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पीएम सूर्य घर योजना से बदल रही तस्वीर, घर-घर बन रहा ऊर्जा उत्पादक

नई दिल्ली: विश्व की आधुनिक अर्थव्यवस्था और जीवनशैली आज ऊर्जा पर आधारित है। वर्तमान में वैश्विक ऊर्जा खपत का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा जीवाश्म ईंधनों—कोयला, तेल और गैस—से आता है। ऊर्जा उत्पादन कुछ क्षेत्रों में केंद्रित होने के कारण पश्चिम एशिया जैसे इलाकों में पैदा होने वाला तनाव पूरी दुनिया, विशेषकर भारत, को प्रभावित करता है। हाल के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर और विकेंद्रीकृत व्यवस्था की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है।

इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए भारत हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, पीएम-कुसुम, पीएम-जनमन और अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाएं देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं।

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना इस परिवर्तन की सबसे बड़ी मिसाल बनकर उभरी है। 13 फरवरी 2024 को शुरू हुई इस योजना से 22 जून 2026 तक 43.37 लाख से अधिक परिवार जुड़ चुके हैं। सरकार अब तक 24,895 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी जारी कर चुकी है। इस योजना के तहत घरों में लगाए गए रूफटॉप सोलर सिस्टम से 12.7 गीगावाट बिजली ग्रिड में जुड़ चुकी है।

यह योजना नागरिकों को केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक बना रही है। लोग सौर ऊर्जा से घरों की बिजली जरूरतें पूरी कर रहे हैं, इंडक्शन कुकटॉप अपना रहे हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज कर रहे हैं। इससे एलपीजी और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम हो रही है।

आज भारत 283.46 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हरित ऊर्जा उत्पादक बन चुका है। देश की कुल बिजली क्षमता का 51.5 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आता है। 2030 तक 500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के साथ भारत न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि वैश्विक हरित नेतृत्व की दिशा में भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।