आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा की फिर से दिल्ली कैबिनेट में वापसी हो गई है। कार्यकर्ता से राजनेता बने, कपिल मिश्रा में पिछले कुछ सालों में गजब का बदलाव देखने को मिला है। कभी बीजेपी, आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले कपिल मिश्रा बीजेपी में शामिल होकर हिंदुत्व के पोस्टर बॉय बन गए हैं।
44 साल के कपिल मिश्रा 2010 के दौरान राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों में सक्रिय रूप से शामिल थे। उन्होंने अपना राजनीतिक करियर आम आदमी पार्टी के साथ शुरू किया और 2015 में करावल नगर से पहली बार विधायक बने। कपिल मिश्रा को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2015 में अपने मंत्रिमंडल में जल संसाधन मंत्री के रूप में शामिल किया था।
पूर्व सीएम केजरीवाल और पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाने की वजह से कपिल मिश्रा को 2017 में मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया था। बाद में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 2019 में विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया।
आम आदमी पार्टी से बाहर किए जाने के बाद वे बीजेपी में शामिल हो गए और पार्टी की दिल्ली इकाई के उपाध्यक्ष पद तक पहुंचे। 2020 में कपिल मिश्रा को बीजेपी ने मॉडल टाउन से टिकट दिया लेकिन वे जीत नहीं पाए। लेकिन कपिल मिश्रा हार से निराश नहीं हुए और जैसे जैसे वक्त बीता तो कपिल मिश्रा बीजेपी के लिए हिंदुत्व के पोस्टर बॉय बन गए। उन पर 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान भड़काऊ भाषण देने का भी आरोप लगा।
2025 में कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी के मनोज कुमार त्यागी को 23,355 वोटों के अंतर से हरा दिया। गुरुवार को मंत्री पद की शपथ लेने से पहले कपिल मिश्रा ने दिल्ली को विश्व स्तरीय शहर बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे पर काम करने की बात कही
दिल्ली की सियासत के अहम किरदार कपिल मिश्रा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। सोशल वर्क में कपिल मिश्रा ने एमए किया है। 11 दिन के इंतजार के बाद रामलीला मैदान में सीएम रेखा गुप्ता के साथ कपिल मिश्रा ने मंत्री पद की शपथ ली।