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दो दशकों की नक्सली क्रूरता का गवाह बस्तर, सीएम विष्णु देव साय ने अंत की ठानी

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सुकमा जिले के इस गांव में लगीं शहीद जवानों की ये मूर्तियां, नक्सलियों की क्रूरता का सबसे बड़ा उदाहरण है। ये वो जवान हैं, जिन्होंने मार्च 2020 में हुए नक्सली हमले में अपनी जान गंवाईं, लेकिन इन सबके पीछे छूट गया इन जवानों के परिवारों का दर्द। नक्सल अटैक में किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने अपना पिता, तो किसी ने अपना पति। कुछ ऐसे बच्चे भी हैं जो अपने पिता के साए से भी महरूम रह गए।

नक्सलियों की क्रूरता से मिले दर्द का लंबा चौड़ा इतिहास है। 2018 में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग बिछाकर एक हमले को अंजाम दिया था। नक्सलियों के निशाने पर सिर्फ जवान ही नहीं रहे, बल्कि वो आम आदिवासी भी हैं, जिनके हक़ की लड़ाई का वो दावा करते हैं। दशकों तक नक्सलियों ने बस्तर के इस इलाके में कायरता से आम लोगों और जवानों को निशाना बनाया। इस क्रूरता का दंश लोग आज भी झेल रहे हैं, किसी ने अपना पैर खोया तो किसी ने परिवार का इकलौता सहारा। लेकिन अब सरकार ने ठान लिया है कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त कर दिया जाएगा।

अगर पिछले दो दशक की बात करें तो नक्सली हिंसा में लगभग 1300 से अधिक जवानों की शहादत हुई, जबकि 1800 से अधिक निर्दोष आदिवासी ग्रामीण, जिसमें महिला, बच्चे, बुजुर्ग शामिल हैं, उन्हें नक्सलियों ने अपना निशाना बनाया।

नक्सलियों को बस्तर में विकास से परहेज है। सड़क, पुलिया, स्कूल, आंगनबाड़ी, मोबाइल टावर कुछ भी नक्सलियों को मंजूर नहीं था। लेकिन आज बस्तर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास की राह पर दौड़ रहा है। आने वाला समय बस्तर और छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों के बदलाव का होगा, और नक्सल मुक़्त भी।