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क्लीनिक की आड़ में चल रहा था फेक करेंसी का अड्‌डा, 10 हजार के जाली नोट बरामद, 2 गिरफ्तार

मेरठ में पुलिस ने बड़ी तादात में नकली नोट पकड़े हैं। वहीं फेक करेंसी के कारोबार में शामिल 2 आरोपियों को भी मौके से अरेस्ट किया है। पकड़े गए 2 लोगों में एक कंपाउंडर है जो नकली नोटों के धंधे में शामिल था। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है। इनके पास से 10 हजार रुपयों की फेक करेंसी भी बरामद की गई है। इसमें 500-500 के 20 नकली नोट मिले हैं। दोनों आरोपियों ने बताया कि पिछले 6 महीनों में ये लोग बाजार में लाखों के नकली नोट उतार चुके हैं।

आपको बता दे एक बार फिर शहर में पकड़े गए जाली नोट पुलिस ने जिस आरोपित कंपाउंडर लोकेश गुप्ता को अरेस्ट किया है वो रिठानी परतापुर में अपना क्लीनिक खोले बैठा है। लोकेश खुद को डॉक्टर बताता है, अपना क्लीनिक चलाता है। मूलरूप से बिहार का रहने वाला है। अपने इस क्लीनिक की आड़ में लोकेश यहां से नकली नोटों का धंधा चला रहा है। हालांकि पुलिस दोनों आरोपितों से पूछताछ कर उनके सरगना तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। माना जा रहा है कि गिरोह के तार बिहार से जुड़े हुए हैं। पूछताछ में आरोपित लोकेश ने बताया कि उसने किसी अस्पताल में कंपाउंडर का कोर्स किया है। यहां कालोनी में मरीज देखकर दवा देता है। पुलिस ने लोकेश उसके एक साथी को अरेस्ट किया है।

जानकारी के अनुसार दोनों ही आरोपी युवक बिहार के रहने वाले हैं। लोकेश का साथी मेरठ इंडस्ट्रियल एरिया में एक कंपनी में काम करता है। दोनों रात को अंधेरे का फायदा उठाकर परतापुर के बाजारों में नकली नोट चलाते हैं। लोकेश गुप्ता ने बताया कि घाट के रहने वाले दीपेंद्र त्यागी ने उन्हें नकली नोट चलाने को दिए थे। पुलिस ने दीपेंद्र के घर पर दबिश दी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही उसे लोकेश गुप्ता और उसके साथी की गिरफ्तारी का पता चल गया था।

जहां दुकानदार को शक होने पर पुलिस को बताया लोकेश उसका साथी कैसे पकड़ में आए पुलिस क्लियर नहीं बता रही। लेकिन परतापुर बाजार में किसी दुकानदार ने पुलिस को इसकी सूचना दी थी। दुकानदार को लोकेश पर शक हो गया था। इसी शक के चलते उसने यूपी-112 पर कॉल कर मामले की सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों को पकड़ा।

वहीं दीपेंद्र घर से फरार हो चुका है। उसकी रिश्तेदारी में दबिश डालकर दीपेंद्र त्यागी की धरपकड़ की जा रहा है। पुलिस को अभी तक जानकारी मिली है कि बिजनौर का रहने वाला कोई युवक उन्हें नकली नोट मुहैया करा रहा है। उक्त नोटों को कनेक्शन बिहार से जुड़ा हुआ है। बिहार के रहने वाले कर्मचारियों से शहर में नकली नोटों की खेप को बाजार में उतारा जा रहा है।

लोकेश गुप्ता ने बताया कि दीपेंद्र त्यागी उन्हें असली के बदले में दोगुने नकली नोट देता है, जिन्हें वह रात के अंधेरे में बाजार में चलाते है। छह माह से बाजार में नकली नोटों को चलाने का धंधा कर रहे है। लोकेश गुप्ता ने बताया कि बिहार के रहने वाले काफी लोग इस धंधे को कर रहे है, वो लोग है, जो बिहार से आकर निजी कंपनियों को मजदूरी करते है। पुलिस लोकेश गुप्ता के अन्य साथियों और नकली नोटों को मुहैया कराने वाले आरोपितों की तलाश कर रही है।