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बुंदेलखंड में जल संकट से निपटेगी योगी सरकार, 19.1 करोड़ के इंडिया-इजराइल वाटर प्रोजेक्ट पर तेजी से काम

बुंदेलखंड में पानी की कमी और सीमित जल संसाधनों को देखते हुए योगी सरकार जल संरक्षण, बेहतर सिंचाई और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। झांसी के बड़ागांव विकासखंड के गंगावली गांव में करीब 19.1 करोड़ रुपये की लागत से मिनी पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण काम पूरे हो चुके हैं। इनमें जलाशय का निर्माण, जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग, सोलर पंप, नहर से जलाशय तक पानी पहुंचाने के लिए इंटेक पाइप और इंटेक वेल, पीयूएफ पैनल से बने भवन और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल हैं।

अब परियोजना के अगले चरण में माइक्रो इरिगेशन, ग्रीनहाउस, सिंचाई ऑटोमेशन और किसान प्रशिक्षण जैसे काम किए जाएंगे। परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन का मौजूदा चरण 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें उपलब्ध पानी का अधिकतम और वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।

इस मॉडल में जल संरक्षण, जल भंडारण, सौर ऊर्जा, माइक्रो इरिगेशन, आधुनिक कृषि तकनीक और किसान प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ा गया है। इसके तहत जलाशय, नहर से पानी लाने की व्यवस्था, पाइपलाइन, सोलर पंप, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम, नेचुरल एसटीपी, कृषि मशीनरी और आधुनिक खेती से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को यह दिखाना है कि कम पानी में भी बेहतर सिंचाई और अच्छी फसल कैसे हासिल की जा सकती है।

गंगावली में परियोजना का काम अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। जलाशय क्षेत्र की पहचान और फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है। जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग भी पूरी कर ली गई है। पीयूएफ पैनल से बने भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है और वहां सीसीटीवी की व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा सोलर पंप स्थापित कर दिया गया है। नहर से जलाशय तक पानी पहुंचाने के लिए इंटेक पाइप और इंटेक वेल का निर्माण भी पूरा हो चुका है। गांव से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे जलाशय में जाने से रोकने और उसका उपचार करने के लिए नेचुरल एसटीपी भी बनाया गया है। जलाशय के आसपास सड़क निर्माण का काम अभी जारी है।

मिनी पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 8.5 हेक्टेयर जमीन पर आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। अगले चरण में ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाया जाएगा। इसके साथ ग्रीनहाउस, टनल, पाइपलाइन और सिंचाई के ऑटोमेशन सिस्टम को भी शुरू किया जाएगा। इससे किसानों को खेत में यह समझने का मौका मिलेगा कि फसल की जरूरत के हिसाब से कितना पानी देना चाहिए और कम पानी में अधिक उत्पादन कैसे लिया जा सकता है।

परियोजना के तहत पानी की खपत, सिंचाई की दक्षता, फसल उत्पादन, लागत और जल उत्पादकता जैसे बिंदुओं पर भी तकनीकों के परिणामों का आकलन किया जाएगा। परियोजना में सिर्फ सुविधाएं तैयार करने पर ही नहीं, बल्कि किसानों को इन तकनीकों का इस्तेमाल सिखाने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत कुल 72 व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। हर सत्र में करीब 100 किसान शामिल होंगे।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को वाटर बजटिंग, फर्टिगेशन, फसल योजना, सिंचाई संचालन और कृषि मशीनरी के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी।इससे किसानों को उपलब्ध पानी के हिसाब से फसल का क्षेत्र तय करने और सिंचाई की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि गंगावली में तैयार किए जा रहे इस मिनी पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों को आगे दूसरे क्षेत्रों में भी लागू करने की तैयारी है। इसके अगले चरण में बड़ागांव विकासखंड में पाहुज नहर के डाउनस्ट्रीम स्थित 24 अन्य गांवों में विस्तृत प्रदर्शनात्मक परियोजना प्रस्तावित है। इससे गंगावली में सफल साबित होने वाली तकनीकों और तरीकों को दूसरे गांवों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता एवं वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम ने बताया कि परियोजना के मौजूदा निर्माण और क्रियान्वयन चरण को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद परियोजना का संचालन और रखरखाव जून 2029 तक किए जाने का प्रस्ताव है। वहीं विस्तारित प्रदर्शन और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम अक्टूबर 2026 से मई 2029 तक चलाने की योजना है। इस परियोजना के जरिए बुंदेलखंड में कम पानी में बेहतर खेती, जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई का एक ऐसा मॉडल तैयार करने की कोशिश की जा रही है, जिसे आगे बड़े क्षेत्र में लागू किया जा सके।