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'तकनीक और जमीनी जुड़ाव से बदलेगा कृषि क्षेत्र': CM योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए तकनीक, संस्थागत सुधार और जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब केवल नीतियां बनाने का समय नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने पर फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “देश में अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं। अगर इन क्षेत्रों में सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जाएं तो बेहतर परिणाम मिलते हैं। अब प्रयोगशाला को खेत तक पहुंचाया जा रहा है।”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि जरूरत मजबूत नेतृत्व की है, जो योजनाओं को आगे बढ़ा सके। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार पहल करती है तो राज्य सरकारें भी उसे आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने 2017 का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय राज्य में 69 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) थे, जिनमें से कई बंद होने की कगार पर थे। “पहले मेरा अनुभव KVK के साथ अच्छा नहीं था, लेकिन आज हर केंद्र ने उल्लेखनीय काम किया है। अब वैज्ञानिक सीधे किसानों से जुड़कर काम कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।

कृषि क्षेत्र की प्रगति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीक कृषि के विकास में अहम भूमिका निभा सकती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि धान का उत्पादन 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है और सरकार का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत को कम करना है। उन्होंने किसान राम शरण वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद उनसे खेती के गुर सीखे जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जहां एक साल में केवल एक फसल होती थी, अब वहां तीन फसलें उगाई जा रही हैं। साथ ही उन्होंने माना कि पहले किसानों के पास सही मार्गदर्शन और जानकारी का अभाव था, जिसे अब दूर किया जा रहा है।