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Chhattisgarh: विद्युत सयंत्र धमाके में एक और मजदूर की मौत, मृतक संख्या बढ़कर 14 हुई

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले में वेदांता विद्युत संयंत्र में हुए धमाके में घायल एक और मज़दूर की मौत के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। सक्ती के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात एक और घायल मज़दूर ने दम तोड़ दिया, जिससे इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या 14 हो गई।

उन्होंने बताया कि इस घटना में घायल हुए 20 मज़दूरों में से पांच को बेहतर इलाज के लिए रायपुर भेज दिया गया है, जबकि 15 का इलाज रायगढ़ ज़िले के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। यह धमाका मंगलवार दोपहर को सिंघीतराई गांव में स्थित वेदांता लिमिटेड के विद्युत संयंत्र में हुआ। धमाका एक स्टील ट्यूब में हुआ, जिससे बॉयलर से टरबाइन तक तेज दबाव वाली भाप ले जाई जा रही थी।

इस धमाके में कई मज़दूर बुरी तरह झुलस गए। अधिकारियों के मुताबिक, चार मज़दूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 10 अन्य ने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटना के तुरंत बाद बचाव अभियान शुरू कर दिया गया, और स्थानीय प्रशासन व पुलिस की टीमें फौरन मौके पर पहुंचीं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और मरने वाले हर मजदूर के परिवार को पांच- पांच लाख रुपये और घायलों को 50 हज़ार रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की। उन्होंने बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को घटना की जांच के आदेश भी दिए, और भरोसा दिलाया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, ज़िला प्रशासन ने एक अलग मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश दिए हैं, जबकि कंपनी ने अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी घायलों को मुफ़्त और उचित चिकित्सा सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि उनकी देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सक्ती के कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने मजिस्ट्रीयल जांच के लिए डभरा के अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) को नियुक्त किया है। एसडीएम से 30 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

इस रिपोर्ट में दुर्घटना के कारणों-जैसे कि यह तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुई या मानवीय भूल के कारण और प्लांट में की गई सुरक्षा जांचों के विवरण जैसे अहम पहलुओं को शामिल किया जाएगा। इस बीच, विपक्षी दल कांग्रेस ने प्लांट प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज करने और घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया और सरकार पर दोषियों को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये और घायलों के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की भी मांग की।

सिंघीतराई में 1,200 मेगावाट के कोयला-आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट (600 मेगावाट की दो यूनिट) का निर्माण, जिसका मूल स्वामित्व एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड के पास था, 2009 में शुरू हुआ था, लेकिन 2016 से 2022 के बीच यह रुका रहा।

वेदांता ने 2022 में इस प्लांट का अधिग्रहण कर लिया, जिसके बाद 600 मेगावाट की एक यूनिट पिछले साल अगस्त में पूरी होकर चालू हो गई, जबकि दूसरी यूनिट का निर्माण अभी भी चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने धमाके के बाद वहां मची अफरा-तफरी और तबाही के मंज़र का वर्णन किया।

पश्चिम बंगाल के रहने वाले और संयंत्र में पेंटर के तौर पर काम करने वाले एक मज़दूर अजीत दास कर ने बताया कि धमाका ऐसा लगा जैसे कोई मिसाइल आकर गिरी हो। उन्होंने कहा, "हमने अभी-अभी दोपहर करीब 2:30 बजे अपना भोजन खत्म ही किया था कि तभी एक ज़ोरदार धमाका हुआ और चारों तरफ़ घना धुआं फैल गया। हम करीब 17 मीटर की ऊंचाई पर काम कर रहे थे। धमाका बॉयलर नंबर एक के पास करीब नौ मीटर की ऊंचाई पर हुआ। मैं एक अलमारी के अंदर छिप गया। नीचे काम कर रहे मज़दूर बुरी तरह झुलस गए थे।"

उन्होंने बताया कि घटना के समय वहां पर मौजूद कई मज़दूर कथित तौर पर पेंटिंग का काम कर रहे थे।