Uttar Pradesh: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े फंड के कथित गबन मामले की एसआईटी जांच चल रही है, ऐसे समय में मुख्यमंत्री का दौरा हुआ है। अखिलेश यादव ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री के भाषण में आत्मविश्वास की कमी नजर आई और वे उदास दिखाई दिए।
आदित्यनाथ द्वारा अयोध्या में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करने के कुछ घंटे बाद एक तीखी पोस्ट में, यादव ने पूछा कि मुख्यमंत्री के भाषण में ‘‘बयानों से अधिक धमकियां’’ क्यों थीं और सवाल किया कि क्या शुक्रवार के कार्यक्रम की योजना अचानक बनाई गई थी या उस दिन, जिस दिन विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।
यादव ने शाम को एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘आज के भाषण में बयान कम, धमकी अधिक क्यों थी? आज का कार्यक्रम अचानक बना था या जिस दिन एसआईटी बनी थी, उस दिन? सूत्र ये क्यों कह रहे हैं कि स्थानीय बीजेपी विधायकों और पदाधिकारियों के कहने पर ये कार्यक्रम अचानक तय किया गया, जिससे कि बीजेपी की राजनीतिक जमीन बचाई जा सके नहीं तो अयोध्या मंडल ही नहीं, पूरे यूपी में बीजेपी का सूपड़ा साफ़ होना तय है।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘भौतिक रूप से भ्रमण कर, उस एसआईटी के काम को प्रभावित करने की कोशिश न की जाए, जो पहले से ही विवादास्पद सदस्यों और कलंकित छवि के कारण शंकाओं के घेरे में है। आज वहां चेहरा उतरा हुआ क्यों था? आवाज़ को तो जानबूझकर ऊंची करने का प्रयास पूरा था लेकिन आत्मविश्वास शून्य क्यों था? इस बार अपने ख़ास लोगों से मिले क्यों नहीं?’’
यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जनता कह रही है ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ नहीं ‘सोने का सोना, चांदी की चांदी’ करें। उन्होंने कहा कि चढ़ाए गये पैसों, अनमोल शिलाओं के अलावा बहुमूल्य धातुओं और जेवरों का भी हिसाब देना ही पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि 13 जून को, उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर में दान राशि के गबन के आरोपों की जांच के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अनुरोध के बाद तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। जांच का आदेश तब दिया गया था जब सात जून को यादव ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया था जिनमें आरोप लगाया गया था कि राम मंदिर में दान के रूप में दिए गए करोड़ों रुपये गायब हैं और अदालतों से मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था।