Assam: असम के हर शहर हर गांव में बुधवार को माघ बिहू उत्सव का जश्न मनाया जा रहा है। ये उत्सव अच्छी फसल और प्रकृति के प्रति धन्यवाद देने का त्योहार है। गांवों और कस्बों में दिन की शुरुआत मेजी जलाने के साथ हुई, और लोगों ने इसके चारों और खड़े होकर प्रकृति को धन्यवाद दिया, गीत गाए। इस दौरान पूरा माहौल खुशनुमा दिखा।
डिब्रूगढ़ में लोगों ने एक साथ इकट्ठा होकर भोगली बिहू के लिए बने पकवानों का आनंद लिया। नए कपड़े पहने और मेजी जलाई। बांस, पुआल और लकड़ी से बनी मेजी को जलाना एक फसल चक्र के खत्म होकर नई फसल बोने का प्रतीक है। इस दौरान सुख समृद्धि के लिए प्रार्थनाएं की जाती हैं।
शिवसागर पुलिस लाइन में रह रहे कर्मचारियों और अधिकारियों ने भी मेजी जलाई और गर्मजोशी से भाईचारे का इजहार किया। भोगली बिहू पर्व के दिन गुवाहाटी के प्राचीन लतासिल गणेश मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और मेजी जलाकर भगवान से सुख समृद्धि मांगी और प्रकृति का आभार जताया।
माघ बिहू को भोगली बिहू के नाम से भी जाना जाता है, ये त्योहार असम की समृद्ध कृषि विरासत की झलक दिखाता है। ये खुशहाली, एकता, अच्छी फसल और लोगों के बीच अटूट रिश्ते का उत्सव है। भोगली बिहू की पूर्व संध्या पर उरुका की रात को सामूहिक भोज का आयोजन किया गया था। ये त्योहार असम के लोगों का प्रकृति से खास जुड़ाव का प्रतीक है इस त्योहार को पारंपरिक रीति-रिवाजों, प्रार्थनाओं और सांस्कृतिक समारोहों के साथ मनाया जाता है।