भुवनेश्वर, 22 मई (भाषा) ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शुक्रवार को पुरी में आगामी भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा के सुचारू संचालन के लिए अधिकारियों और सेवकों के बीच उचित समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर का संचालन श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य विधि विभाग द्वारा किया जाता है।
हरिचंदन ने राज्य अतिथि गृह में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सेवक और अन्य हितधारक उपस्थित थे।
मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, 'सेवाओं और प्रशासन के बीच समन्वय बनाए रखते हुए रथ यात्रा की सभी गतिविधियों को समन्वित, व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संचालित करने के लिए चर्चा की गई।'
उन्होंने 16 जुलाई से शुरू होने वाली भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ की नौ दिवसीय वार्षिक यात्रा के दौरान दैतापति सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
मंत्री ने कहा कि जब देवता 12वीं शताब्दी के पुरी स्थित मंदिर से वार्षिक रथ यात्रा के लिए बाहर आते हैं, तो दैतापति सेवक उनके संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा, “वह देवताओं की हर चीज का ध्यान रखते हैं, इसलिए अनुष्ठानों को समय पर संपन्न करने से उत्सव सुचारू रूप से संचालित होता है।”
हरिचंदन ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि दैतापति सेवकों में कोई भेद नहीं है और वे भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी भक्ति और सेवा में एकजुट रहते हैं।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने रथ यात्रा और रथ खींचने के लिए आवश्यक सामग्री की तैयारियों के बारे में बैठक को जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि रथ की लकड़ी, रस्सियां, वस्त्र, चंदन और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहले से ही भंडारित कर ली गई हैं।
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राखी नरेश
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