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‘सेना की छवि खराब करने का प्रयास’: ‘वर्दीधारी पुरुषों’ के संवाददाता सम्मेलन के वीडियो पर सेना ने कहा

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) सेना ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक वीडियो पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें कुछ लोग सैन्य वर्दी में एक संवाददाता सम्मेलन में भाग लेते हुए दिखाई दे रहे हैं और कहा कि उनमें से तीन व्यक्तियों को “अनुशासनहीनता और गैर-सैनिक आचरण” के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

सेना ने ‘एक्स’ पर अपने हैंडल से जारी एक बयान में कहा कि संवाददाता सम्मेलन का वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया मंच पर उसकी छवि को “बदनाम करने के प्रयास” के तहत प्रसारित किया जा रहा है।

वीडियो में दिख रहे व्यक्तियों का जिक्र करते हुए सेना ने कहा कि दो राजनीतिक नेताओं के अलावा, “चौथा व्यक्ति” एक “भगोड़ा” है और उसके खिलाफ सैन्य और नागरिक दोनों अदालतों में अनुशासनात्मक कार्यवाही चल रही है।

बृहस्पतिवार को यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें विपक्ष के दो राज्यसभा सदस्यों - मनोज झा और संजय सिंह - ने पत्रकारों से बातचीत की।

इस पोस्ट में सेना ने हैशटैग “फर्जी अलर्ट, सावधान” का इस्तेमाल करते हुए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को किसी भी अफवाह पर विश्वास न करने की चेतावनी दी।

सेना द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर में झा और सिंह के साथ वर्दी पहने दो व्यक्ति बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर पर दो डिजिटल स्टैम्प लगे हैं जिन पर “फर्जी” और “भ्रामक” शब्द लिखे हैं।

सेना ने इस पोस्ट में किसी भी राजनीतिक नेता का नाम नहीं लिया।

सेना ने कहा, “एक संवाददाता सम्मेलन का वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित किया जा रहा है, जिसका मकसद भारतीय सेना की छवि को धूमिल करना है।”

सेना ने कहा, “यह दोहराया जाता है कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति, चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी नरेंद्र, को अनुशासनहीनता और गैर-सैनिक आचरण के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।”

इसमें आगे कहा गया है कि चौथा व्यक्ति, शंकर सिंह गुर्जर, “भगोड़ा है और उसके खिलाफ सैन्य और नागरिक दोनों अदालतों में अनुशासनात्मक कार्यवाही चल रही है”।

सेना ने कहा, “ये लोग जानबूझकर सोशल मीडिया पर फर्जी, दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक कहानियां फैला रहे हैं ताकि अपने खुद के दुर्व्यवहार और सेवा से बर्खास्तगी से ध्यान भटका सकें।”

सेना ने कहा, “नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे इस तरह के दुष्प्रचार के झांसे में न आएं और गलत सूचनाओं के प्रति सतर्क रहें।”

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश