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दिल्ली सरकार ने जल शुल्क कम करने के लिए डीजेबी की सरल नीति को मंजूरी दी

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को बताया कि उनकी सरकार ने बुनियादी ढांचे के वास्ते जल शुल्क (आईएफसी) को कम करने के लिए संपत्तियों पर दिल्ली जल बोर्ड की सरलीकृत नीति को मंजूरी दे दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के लिए आईएफसी (जल एवं सीवर बुनियादी ढांचा शुल्क) केवल नई निर्माण परियोजनाओं या मौजूदा संपत्ति पर किए गए अतिरिक्त निर्माण पर ही लागू होगा।

गुप्ता ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, 'जल एवं सीवर बुनियादी ढांचा शुल्क अब भवन के कुल क्षेत्रफल के बजाय वास्तविक जल मांग के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।'

उन्होंने कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य नागरिकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और विकास को प्रोत्साहित करना है।

गुप्ता ने कहा कि सरकार ने विभिन्न श्रेणियों की कॉलोनियों और आर्थिक रूप से प्रभावित वर्गों को विशेष राहत प्रदान करने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा, “नए घर बनाने या अतिरिक्त निर्माण कार्य कराने वाले परिवारों को अक्सर कई लाख रुपये का शुल्क देना पड़ता था, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती थी। इसे ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सरकार ने पूरी व्यवस्था की समीक्षा की और इसे सरल, अधिक पारदर्शी और जनता के लिए अधिक लाभकारी बनाने का निर्णय लिया।”

गुप्ता ने कहा कि सरकार ने बताया कि ई और एफ श्रेणी की कॉलोनियों में आईएफसी पर 50 प्रतिशत तथा जी और एच श्रेणी की कॉलोनियों में 70 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा, 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर बनी 50 वर्ग मीटर या उससे छोटी आवासीय इकाइयों को अतिरिक्त 50 प्रतिशत रियायत दी जाएगी, जिससे छोटे परिवारों और मध्यम वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, धार्मिक स्थलों और धारा 12एबी के तहत पंजीकृत धर्मार्थ संस्थाओं को भी जल और सीवर आईएफसी पर अतिरिक्त 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। वहीं, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ व्यवस्था अपनाने वाले संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सीवर आईएफसी में 50 प्रतिशत तक की रियायत प्रदान की जाएगी।

जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि 200 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे और अधिकारियों द्वारा अनावश्यक माप-जोख या उत्पीड़न की कोई गुंजाइश नहीं होगी।

इस बीच, सरकार नजफगढ़ क्षेत्र में 860 करोड़ रुपये की लागत से 12 नए विकेन्द्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्र (डीएसटीपी) भी विकसित कर रही है।

भाषा नोमान नोमान नरेश

नरेश