जबलपुर, 22 मई (भाषा) मॉडल से अभिनेत्री बनी त्विषा शर्मा (33) की कथित दहेज मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की एक टीम से उनके शव के दोबारा पोस्टमार्टम की इजाजत दे दी।
देश भर में चर्चा का विषय बने इस मामले को लेकर जबलपुर जिला न्यायालय में भी गहमागहमी देखने को मिली, जहां आत्मसमर्पण करने आए त्विषा के पति समर्थ सिंह को भोपाल पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
पेशे से वकील समर्थ सिंह 12 मई को त्विषा शर्मा की मौत के बाद उसके और उसकी मां एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से गिरफ्तारी से बच रहा था।
जबलपुर जिला न्यायालय में उसके मौजूद होने की खबर मिलने के कुछ देर बाद जबलपुर पुलिस ने समर्थ को हिरासत में लिया और ओमती थाने ले गई, जहां उसे भोपाल पुलिस को सौंप दिया गया।
ओमती के थाना प्रभारी राजपाल सिंह बघेल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि हिरासत में लेने के बाद भोपाल पुलिस उसे लेकर रवाना हो गई है।
इस बीच, त्विषा के परिवार के अनुरोध पर मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की है।
पुलिस ने समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 30,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी।
इससे पहले, दिन में समर्थ सिंह ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की अपनी याचिका वापस ले ली थी। इसके साथ ही समर्थ के पास आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
आत्मसमर्पण के लिए जबलपुर जिला न्यायालय पहुंचने पर भी गहमागहमी रही क्योंकि त्विषा के परिजनों के वकील ने यह कहते हुए विरोध किया कि उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक आरोपी समर्थ को या तो भोपाल जिला न्यायालय या फिर मामले के जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहिए।
भोपाल की एक अदालत ने समर्थ की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी थी।
तकरीबन दो घंटे जबलपुर जिला न्यायालय में नाटकीय स्थिति बनी रही लेकिन वह आत्मसमर्पण नहीं कर सका। इसी बीच न्यायालय परिसर पहुंची जबलपुर पुलिस ने समर्थ को हिरासत में ले लिया।
त्विशा शर्मा भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में 12 मई को फांसी पर लटकी पाई गई थी। उसके परिवार ने उसके ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता एवं दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की है।
इससे पहले, उच्च न्यायालय ने त्विषा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराए जाने का उसके परिजनों का अनुरोध स्वीकार कर लिया।
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि दूसरा पोस्टमार्टम राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों की एक टीम द्वारा भोपाल में किया जाए।
उच्च न्यायालय ने त्विषा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा की याचिका पर यह आदेश दिया।
त्विषा के परिजनों के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से एम्स दिल्ली से डॉक्टरों की टीम लाने की व्यवस्था करने को कहा है।
उन्होंने कहा कि अदालत ने एम्स के निदेशक को जल्द से जल्द विशेषज्ञों की एक टीम गठित करने के लिए भी कहा है।
मामले में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का समर्थन किया।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उन डॉक्टरों की क्षमता पर संदेह नहीं कर रही है जिन्होंने पहले पोस्टमॉर्टम किया था।
त्विषा के परिजनों की ओर से दोबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए दायर की गई इस याचिका में पहले पोस्टमार्टम को चुनौती दी गई थी और कहा गया कि इसकी रिपोर्ट में बहुत सारी खामियां हैं।
ज्ञात हो कि दो दिन पहले भोपाल की एक अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग वाली त्विषा के परिजनों की याचिका को खारिज कर दिया था।
त्विषा के शव का 13 मई को राजधानी भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पोस्टमार्टम हुआ था और तभी से शव वहां के शवगृह में रखा हुआ है।
भोपाल पुलिस ने पिछले दिनों त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा को पत्र लिखकर कहा था कि मृतका के शव का 13 मई को पोस्टमार्टम हुआ और वर्तमान में वह भोपाल के एम्स के शवगृह में शून्य से नीचे चार डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा हुआ है।
पुलिस ने एम्स के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि शव को सड़ने से बचाने के लिए शून्य से नीचे 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाना चाहिए और यह सुविधा एम्स भोपाल में नहीं है।
त्विषा के परिजनों की ओर से गिरिबाला सिंह को भोपाल की एक अदालत से मिली अग्रिम जमानत को भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
इस मामले में उच्च न्यायालय ने गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है और अगली सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित की है।
भाषा ब्रजेन्द्र राजकुमार
राजकुमार