कोलकाता, 22 मई (भाषा) कोलकाता की एक अदालत ने शुक्रवार को ‘बांग्ला पोक्खो’ संगठन के संस्थापक गार्गा चटर्जी को जमानत दे दी। उन्हें सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में कोलकाता पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया था।
बैंकशाल अदालत के मजिस्ट्रेट ने चटर्जी को 2,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी और निर्देश दिया कि वह मामले के जांच अधिकारी के सामने सप्ताह में एक बार पेश होंगे।
अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को लेकर कथित तौर पर भ्रामक जानकारी फैलाने और भ्रम पैदा करने के आरोप में कोलकाता पुलिस ने 12 मई को चटर्जी को गिरफ्तार किया था।
बांग्ला पोक्खो के सदस्य कौशिक मैती ने बताया कि चटर्जी के खिलाफ तीन आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें एक मामला भारत निर्वाचन आयोग की ओर से दर्ज कराया गया, जबकि दूसरा कोलकाता पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दर्ज किया था।
उन्होंने कहा कि चटर्जी को दो अन्य मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है और बैंकशाल अदालत द्वारा तीसरे मामले में में जमानत दिए जाने के बाद वह जल्द ही न्यायिक हिरासत से बाहर आ जाएंगे।
अधिकारियों ने बताया कि चुनाव अवधि के दौरान किए गए पोस्ट से संबंधित शिकायतों के सिलसिले में जारी दो समन की कथित तौर पर अनदेखी करने के बाद कोलकाता पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने चटर्जी को गिरफ्तार किया था।
पुलिस की यह कार्रवाई चुनाव अधिकारियों की शिकायतों के बाद हुई, जिनमें आरोप लगाया गया था कि चटर्जी के पोस्ट ने आदर्श आचार संहिता और साइबर कानूनों के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए भ्रामक जानकारी फैलाई और मतदान प्रक्रिया को लेकर अविश्वास पैदा किया।
भाषा गोला नेत्रपाल
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