जयपुर में आयोजित ‘संत संसद 2026’ में आस्था के साथ देशप्रेम का विशेष संगम देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क 10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया। शुरुआत में संतों ने अमर जवान ज्योति पर पहुंचकर शहीदों को नमन किया। वहीं, महिलाओं ने कलश यात्रा के जरिए संतों का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे और उन्होंने नेटवर्क 10 की इस पहल की सराहना की।
इस विशेष कार्यक्रम में जूना अखाड़ा से महामंडलेश्वर स्वामी उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज भी शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जब समाज में जाति और वर्ण की चर्चा हो रही है, तो पूजा, उपासना और वैदिक मंत्रों के अधिकार पर भी विचार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज बिखर रहा है, विधर्म का प्रभाव बढ़ रहा है और राष्ट्र भी कमजोर होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में यदि हम यह कहें कि कुछ वर्गों को वैदिक मंत्रों के उच्चारण का अधिकार नहीं है, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है।
महाराज ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुगल काल में महिलाओं को वैदिक मंत्र सुनने तक की अनुमति नहीं थी और इसका समाज पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा कि इसी कारण कई परंपराएं बाधित हुईं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे उन परंपराओं को नहीं मानते जो समाज को विभाजित करती हैं। उनके अनुसार, मंत्रों का अधिकार सभी को है—चाहे वह महिला हो, शूद्र हो या समाज का कोई भी वर्ग। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज अपने ही लोगों को धार्मिक अधिकारों से वंचित करेगा, तो वे अन्य धर्मों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
स्वामी जी ने वैदिक काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय महिलाओं को भी वेद सुनने और समझने का अधिकार था। उन्होंने आदि शंकराचार्य और उनकी पत्नी भारती देवी के प्रसंग का उदाहरण देते हुए बताया कि महिलाओं की सहभागिता को उस समय सम्मान प्राप्त था।
उन्होंने यह भी कहा कि वेदों की कई ऋचाओं की रचना महिलाओं—जैसे अपाला, घोषा, लोपामुद्रा, मैत्रेयी और गार्गी—द्वारा की गई है। यह दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय परंपरा में महिलाओं को ज्ञान और आध्यात्मिक साधना में समान स्थान प्राप्त था।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वह रूढ़िवादी और भेदभावपूर्ण सोच से ऊपर उठकर समावेशी दृष्टिकोण अपनाए। उन्होंने कहा कि समाज की एकता, समानता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह आवश्यक है कि सभी को समान अधिकार और अवसर प्रदान किए जाएं।