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भारत की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार पर, 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर

New Delhi: भारत की आर्थिक प्रगति ने वैश्विक स्तर पर मजबूती से अपनी पहचान बना ली है। वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत, 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है। अनुमान के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की ओर आगे बढ़ रही है।

भारत की इस आर्थिक प्रगति के पीछे निर्णायक नीतिगत फैसले, संरचनात्मक सुधार, बढ़ती वैश्विक भागीदारी और मजबूत घरेलू मांग मुख्य आधार माने जा रहे हैं।

जीडीपी में मजबूत वृद्धि
भारत की GDP ने लगातार गति पकड़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि 8.2% रही, जबकि पहली तिमाही में यह 7.8% थी। वहीं पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह आंकड़ा काफी बेहतर है। प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक तीनों सेक्टरों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।

मुद्रास्फीति में बड़ी गिरावट
अक्टूबर 2025 में महंगाई दर घटकर ऐतिहासिक स्तर 0.25% पर पहुंच गई। खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट के चलते ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में राहत मिली है। RBI ने रेपो रेट 5.50% पर बनाए रखा है, जिससे आर्थिक स्थिरता बरकरार है।

औद्योगिक उत्पादन मजबूत
सितंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन (IIP) में 4.0% की वृद्धि दर्ज की गई। विनिर्माण क्षेत्र, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोटर वाहन और इंफ्रास्ट्रक्चर श्रेणियों ने उद्योग जगत को गति प्रदान की है।

रोजगार में बढ़ोतरी
भारत में रोजगार और श्रम भागीदारी दर में वृद्धि दर्ज की गई है। अक्टूबर 2025 में:

श्रम भागीदारी दर: 55.4%
महिला श्रम भागीदारी: 34.2%
बेरोजगारी दर: 5.2%

सरकारी योजनाओं जैसे PMKVY, स्टार्टअप इंडिया और PM मुद्रा योजना ने रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

व्यापार और निर्यात में तेजी
अक्टूबर 2025 तक भारत का कुल निर्यात 4.84% बढ़कर 491.80 अरब डॉलर हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य उत्पाद, समुद्री उत्पाद और सेवाओं के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी और नीतिगत छूट लागू की है जिससे वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी मजबूत हुई है।

GST सुधारों का प्रभाव
GST 2.0 के तहत टैक्स संरचना को सरल बनाया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं और MSME सेक्टर को राहत मिली है। अक्टूबर 2025 में GST संग्रह 1.96 लाख करोड़ रुपये रहा, जो रिकॉर्ड स्तर है।