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AI डीपफेक पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, आध्यात्मिक गुरु की पहचान के दुरुपयोग पर रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए उनके नाम और पहचान के दुरुपयोग पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने AI से बने डीपफेक कंटेंट के जरिए उनकी छवि का इस्तेमाल करने पर सख्त प्रतिबंध लगाया है। जस्टिस तुषार राव गेडेला ने यह अंतरिम आदेश डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी (अनिरुद्ध बापू) की याचिका पर सुनाया। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता ने पहली नजर में मजबूत मामला पेश किया है और उनकी छवि, प्रतिष्ठा और वर्षों में बनी साख का गलत तरीके से फायदा उठाया जा रहा है।

याचिका में कहा गया कि कुछ अज्ञात लोगों ने AI टूल्स की मदद से डीपफेक वीडियो, फोटो और आवाज तैयार कर उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया। इन फर्जी वीडियो में उन्हें प्रवचन देते, प्रोडक्ट का प्रचार करते और लोगों से बातचीत करते हुए दिखाया गया, जिससे लोगों को गुमराह किया गया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का कंटेंट न सिर्फ जनता को भ्रमित करता है, बल्कि संबंधित व्यक्ति की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है। कोर्ट ने इसे पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स का उल्लंघन माना।

हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति के याचिकाकर्ता के नाम, आवाज, तस्वीर या शैली का इस्तेमाल नहीं कर सकती, चाहे वह AI या डीपफेक के जरिए ही क्यों न हो। साथ ही, गूगल, मेटा और X जैसे प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया गया कि शिकायत मिलने के 48 घंटे के भीतर ऐसे कंटेंट को हटाया जाए और जिम्मेदार अकाउंट्स की जानकारी भी दी जाए। कोर्ट ने अज्ञात आरोपियों को भी ऐसे सभी गतिविधियों को तुरंत बंद करने और बनाए गए फर्जी कंटेंट का ब्योरा देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई आगे की कार्यवाही पूरी होने के बाद इस साल के अंत में होगी।