Breaking News

पश्चिम बंगाल के फालता में टीएमसी नेता जहांगीर खान को पुलिस ने हाफ पैंट में घुमाया     |   ईरान ने अमेरिकी हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया     |   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अगली सूचना तक बंद रहेगा: पर्शियन गल्फ वॉटरवे मैनेजमेंट अथॉरिटी     |   '2047 तक विकसित भारत का संकल्प‘, NDA की बैठक में बोले गृह मंत्री अमित शाह     |   ‘पीएम मोदी ने देशहित को हमेशा ऊपर रखा’, NDA की मीटिंग में अमित शाह ने कहा     |  

राजौरी में 12 हफ्तों में जंगल में आग लगने की 45 घटनाएं, वन विभाग ने जताई चिंता

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में पिछले 12 सप्ताह के दौरान जंगल में आग लगने की कम से कम 45 घटनाएं दर्ज की गई हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए लोगों से सतर्कता बरतने और सहयोग करने की अपील की है। राजौरी वन मंडल के कालाकोट तहसील स्थित सियालसुई खदर वन क्षेत्र से सामने आए ताजा दृश्यों में जंगल का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में दिखाई दिया। क्षेत्र में लगातार गर्म और शुष्क मौसम के कारण जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में वनाग्नि की घटनाएं सामने आ रही हैं।

पश्चिमी सर्किल, राजौरी के वन संरक्षक सतपाल ने बताया कि राजौरी और नौशेरा वन मंडलों में मिलाकर अब तक लगभग 45 आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा, "मौजूदा वनाग्नि सीजन के दौरान पिछले 12 सप्ताह में बड़ी संख्या में आग की घटनाएं हुई हैं। हालांकि हाल ही में हुई बारिश के कारण तापमान में कुछ गिरावट आई है, जिससे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं की संख्या कम होगी।"

सतपाल ने बताया कि वनाग्नि की शुरुआती अवस्था में ही उसे नियंत्रित करने के लिए संसाधनों की त्वरित उपलब्धता और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक बैठक भी आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि अधिकांश घटनाएं सतही आग (Surface Fire) की हैं, लेकिन इसके बावजूद वन संपदा, जैव विविधता, पक्षियों, जंगली जानवरों और सरीसृपों को काफी नुकसान पहुंचता है।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा, "वनाग्नि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत सहयोग करें, लापरवाही से बचें और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें। हमारे सामूहिक हरित संसाधनों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।" इससे पहले भी राजौरी वन मंडल के कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी के बीच जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं। आग पर काबू पाने और उसे घने जंगलों तक फैलने से रोकने के लिए वन विभाग, फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स, सोशल फॉरेस्ट्री विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों की टीमों को तैनात किया गया था।