भारत अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठजोड़ ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल हो गया है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक लचीली आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है। यहां नयी दिल्ली में ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में आयोजित एक समारोह में गठबंधन में शामिल होने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। वहां उपस्थित लोगों में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, आर्थिक मामलों के लिए अमेरिकी उप-विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे।
यह कदम दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और संबंधों में गंभीर तनाव के दौर के बाद द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई अन्य पहलों पर आगे बढ़ने के प्रयासों के बीच आया है। गोर ने अपनी टिप्पणी में कहा, ‘‘व्यापार समझौते से लेकर पैक्स सिलिका और रक्षा सहयोग तक, दोनों देशों की साथ काम करने की संभावनाएं वास्तव में असीमित हैं।’’
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि पैक्स सिलिका में भारत का प्रवेश केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक कदम है जो द्विपक्षीय संबंधों की समग्र दिशा को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ऐसा देश है जहां प्रतिभा का भंडार है, जो प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देने के लिए काफी है। भारत की इंजीनियरिंग क्षमता इस महत्वपूर्ण गठबंधन के लिए आवश्यक योग्यताएं प्रदान करती है। प्रतिभा के अलावा, भारत ने महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण क्षमता की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति की है और हम इसमें भी पूरी तरह से सहभागिता कर रहे हैं।’’
गोर ने सुझाव दिया कि अमेरिका पैक्स सिलिका ढांचे के तहत भारत के साथ विश्वसनीय एआई प्रौद्योगिकियां साझा कर सकता है। अमेरिकी उप-विदेश मंत्री हेलबर्ग ने गठबंधन में शामिल होने के भारत के फैसले की सराहना की और पैक्स सिलिका को आपूर्ति श्रृंखलाओं में दबाव की रणनीति और ब्लैकमेल के खिलाफ एक पहल बताया, जिसे चीन की ओर एक स्पष्ट इशारा माना जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम देखते हैं कि हमारे मित्र और सहयोगी प्रतिदिन आर्थिक दबाव और ब्लैकमेल के खतरों का सामना कर रहे हैं। उन्हें अपनी संप्रभुता और अपनी समृद्धि के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हम खुद को एक ऐसी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जूझते हुए पाते हैं जो अत्यधिक केंद्रित है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए आज, जब हम पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, तो हम बतौर ‘हथियार’, प्रौद्योगिकी पर निर्भरता को ना कहते हैं, हम ब्लैकमेल को ना कहते हैं और हम मिलकर कहते हैं कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है, लेकिन हमें इस शब्द के अर्थ के बारे में स्पष्ट होना चाहिए।’’ महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक सुरक्षित, लचीली और नवाचार-संचालित आपूर्ति श्रृंखला बनाने के उद्देश्य से यह पहल दिसंबर में शुरू की गई थी।
पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन 12 दिसंबर को वाशिंगटन में आयोजित किया गया था, जहां भागीदार देशों ने पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए।इस घोषणापत्र में कच्चे माल से लेकर सेमीकंडक्टर और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर तक, आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहन आर्थिक और तकनीकी सहयोग की एक साझा दृष्टि तथा पारस्परिक समृद्धि एवं सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया है।
पैक्स सिलिका के सदस्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, यूनान, इजराइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन शामिल हैं।अमेरिकी राजदूत गोर ने पिछले महीने भारत को इस रणनीतिक गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। पैक्स सिलिका के प्रमुख उद्देश्यों में से एक, सहयोगी देशों में एआई-संचालित समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक स्थायी आर्थिक व्यवस्था स्थापित करना है।
पैक्स सिलिका घोषणा के अनुसार, ‘‘हम मानते हैं कि एक विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला हमारी पारस्परिक आर्थिक सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है।’’ घोषणा में कहा गया है, ‘‘हम यह भी मानते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हमारी दीर्घकालिक समृद्धि के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है और हमारी आपसी सुरक्षा एवं समृद्धि की रक्षा के लिए विश्वसनीय प्रणालियां आवश्यक हैं।’’
घोषणा के अनुसार, ‘‘हमारा मानना है कि आर्थिक मूल्य और विकास वैश्विक एआई आपूर्ति श्रृंखला के सभी स्तरों से होकर गुजरेगा, जिससे ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, विनिर्माण, तकनीकी हार्डवेयर, बुनियादी ढांचे और अब तक आविष्कार नहीं किए गए नए बाजारों के लिए ऐतिहासिक अवसर और मांग पैदा होगी।’’