Wednesday, August 10, 2022

क्यों है 5 अगस्त खास, जानें भारतीय इतिहास में आज की तारीख अहम क्यों ?



आज का दिन भारतवासियों के लिए काफी खुशी और गर्व का दिन है. बका दें कि आज के दिन 2019 में लोकसभा और राज्यसभा में Article 370 हटने का बिल पास हुआ था. जिसके बाद जम्मू एंड कश्मीर को राज्य से बदलकर दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के रूप में बना दिया.

जानें क्या है इतिहास-
यूं तो अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को तो विशेष राज्य का दर्जा देता था, लेकिन ये संविधान के ही उन मूल अधिकारों पर भी चोट करता था, जिसे संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान की आत्मा कहा था.

क्या है आर्टिकल 370-
1. संसद को राज्य में कानून लागू करने के लिए जम्मू और कश्मीर सरकार की मंजूरी की आवश्यकता है - रक्षा, विदेशी मामलों, वित्त और संचार के मामलों को छोड़कर.

2. जम्मू और कश्मीर के निवासियों की नागरिकता, संपत्ति के स्वामित्व और मौलिक अधिकारों का कानून शेष भारत में रहने वाले निवासियों से अलग है. अनुच्छेद 370 के तहत, अन्य राज्यों के नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं. अनुच्छेद 370 के तहत, केंद्र को राज्य में वित्तीय आपातकाल घोषित करने की कोई शक्ति नहीं है.

3. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अनुच्छेद 370 (1) (सी) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 अनुच्छेद 370 के माध्यम से कश्मीर पर लागू होता है. अनुच्छेद 1 संघ के राज्यों को सूचीबद्ध करता है. इसका मतलब है कि यह अनुच्छेद 370 है जो जम्मू-कश्मीर राज्य को भारतीय संघ से जोड़ता है. अनुच्छेद 370 को हटाना, जो राष्ट्रपति के आदेश द्वारा किया जा सकता है, राज्य को भारत से स्वतंत्र कर देगा, जब तक कि नए अधिभावी कानून नहीं बनाए जाते.

क्या था जम्मू और कश्मीर का संविधान?
जम्मू और कश्मीर के तत्कालीन संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 3 में कहा गया था कि जम्मू और कश्मीर राज्य भारत संघ का अभिन्न अंग है और रहेगा. अनुच्छेद 5 में कहा गया कि राज्य की कार्यपालिका और विधायी शक्ति उन सभी मामलों तक फैली हुई है, जिनके संबंध में संसद को भारत के संविधान के प्रावधानों के तहत राज्य के लिए कानून बनाने की शक्ति है. 

5 अगस्त को हुआ ऐतिहासिक फैसला-
5 अगस्त 2019 वो तारीख, जिसने आर्टिकल 370 की लकीर को मिटाकर भारत के इतिहास की एक बेमिसाल गाथा लिख दी. आज के दिन ही 2019में भारत की संसद के निचले सदन लोकसभा में संविधान के आर्टिकल 370 को हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया था. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को पढ़ रहे थे तो देश टीवी पर इतिहास को बनते देख रहा था, देश एक सपने को हकीकत का रुप लेते देख रहा था, और देश अपने सिर पर मुकुट को ओढ़ रहा था.

हर तरफ इसी की बात चल रही थी, भारतवासियों में न जानें किस बात की खुशी थी. शायद ये खुशी अपनी जन्नत को अपने हिस्से देखने की खुशी थी.

क्यों हटा आर्टिकल 370-
370 की बेड़ियों ने देश को एक देश, दो विधान, दो प्रधान और दो निशान का एहसास कराया. अनुच्छेद 370 के मुताबिक, जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष अधिकार मिले थे. जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा और अलग संविधान चलता था. रक्षा, विदेश और संचार के विषय छोड़कर सभी कानून बनाने के लिए राज्य की अनुमति जरुरी थी. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती थी.  दूसरे राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे.

अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को तो विशेष राज्य का दर्जा देता था, लेकिन ये संविधान के ही उन मूल अधिकारों पर भी चोट करता था, जिसे संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान की आत्मा कहा था. 72 सालों तक जम्मू कश्मीर और देश के बीच अनुच्छेद 370 की जो फांस थी, जिसे आज ही के दिन 3 साल पहले इतिहास बना दिया गया और एक नए कश्मीर की कहानी लिख दी.

आम कश्मीरियों ने देश को अपने और करीब पाया
अनुच्छेद 370 हटने से ना सिर्फ आतंक के आंकड़ों में सुधार हुआ है, आम कश्मीरियों ने देश को अपने और करीब पाया है. और इस बात को पूरी दुनिया ने तब देखा जब आम कश्मीरी लोगों ने पंचायत चुनाव में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और बताया कि वो बुलेट नहीं बैलेट के जरिए अपना भविष्य खुद तय करता है. 2 साल पहले घाटी में जम्हूरियत इंसानियत और कश्मीरीयत का जो बीज बोया गया था, वो अब फलने फूलने लगा है.


 

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