असम में मानसून की शुरुआत में राभा जनजाति 'बायखो' त्योहार धूमधाम से मनाती है। ये खेती से जुड़ा त्योहार है। इसमें किसान भरपूर फसल की कामना करते हुए जश्न मनाते है।
बुराई को जलाने का प्रतीक अलाव त्योहार का अहम हिस्सा होता है। अलाव के चारों ओर पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं और समुदाय के लोग ईश्वर में अपना भरोसा जताने के लिए जलते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं।
बायखो त्योहार राभा जनजाति के लिए बहुत मायने रखता है। पर्व के सांस्कृतिक पहलू तो हैं ही, साथ ही ये त्योहार कुदरत के साथ जनजाति के जीवंत संबंधों के लिए भी जाना जाता है।