Breaking News

ईरान में फंसे सैकड़ों भारतीय छात्र, ओवैसी की केंद्र से मांग- तुरंत इवैक्यूएशन प्लान तैयार किया जाए     |   थाईलैंड में बड़ा हादसा: सड़क पर गिरी क्रेन, 2 लोगों की मौत और कई वाहन भी क्षतिग्रस्त     |   कोलकाता में CBI की छापेमारी, बैंक फ्रॉड और करोड़ों के गबन मामले में 5 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन     |   कलकत्ता हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस, जस्टिस सुजॉय पाल ने संभाली जिम्मेदारी     |   I-PAC रेड मामला SC पहुंचा, ED ने बंगाल DGP के निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की     |  

केदारनाथ में रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा, अगले सात दिन में फिर से शुरू हो सकती है यात्रा

मूसलाधार बारिश की वजह से क्षतिग्रस्त हुए केदारनाथ पैदल मार्ग पर बचाव अभियान के पांचवें दिन सोमवार को 1400 से ज्यादा फंसे लोगों को रेस्क्यू किया गया। उत्तराखंड सरकार रास्ते को फिर से दुरुस्त कर अगले सात दिन में यात्रा फिर से शुरू करने की कोशिश में लगी है।

अधिकारियों ने बताया कि केदारनाथ-गौरीकुंड रास्ते पर मलबे से एक शव भी बरामद हुआ है। इसके साथ ही 31 जुलाई से शुरू हुए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मिले शवों की संख्या तीन हो गई।

उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि अब केवल केदारनाथ धाम में 50 यात्री अपनी मर्जी से रुके हुए हैं और गौरीकुंड और लिंचोली में कोई यात्री नहीं है।

उन्होंने बताया कि केदारघाटी में मौसम साफ होने पर हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी आई। भारतीय वायुसेना के चिनूक, एमआई17 और छोटे हेलीकॉप्टरों की मदद से केदारनाथ से 645 यात्रियों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया।

विनोद कुमार सुमन ने बताया कि पिछले दिनों केदारनाथ और आसपास के इलाकों में घने बादल छाए होने की वजह से हेलीकॉप्टर से लोगों को रेस्क्यू करने में परेशानी हो रही थी। इसकी वजह से चिनूक एक भी उड़ान नहीं भर पाया, जबकि एमआई17 हेलीकॉप्टर केवल तीन उड़ानें ही भर सका।

उन्होंने बताया कि अभी तक कुल 11,775 लोगों को केदारनाथ पैदल रास्ते से बाहर निकाला जा चुका है। तलाशी और बचाव अभियान में सेना के दो स्निफर डॉग की मदद भी ली जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि सोनप्रयाग, शेरसी, चौमासी, चारधाम हेलीपैड और केदारनाथ हेलीपैड पर लोगों के लिए खाने, पानी और ठहरने के इंतजाम किए गए हैं।

पिछले हफ्ते बुधवार रात को भारी बारिश और बादल फटने की वजह से केदारनाथ पैदल मार्ग पर लिंचोली, भीमबली, घोड़ापड़ाव और रामबाड़ा सहित कई जगहों पर सड़कें बह गई थी। वहीं कुछ रास्तों को भूस्खलन की वजह से नुकसान पहुंचा था। इस वजह से जगह-जगह पर श्रद्धालु फंस गए।