टीवी पर्दे पर भगवान राम का किरदार निभाकर घर-घर में लोकप्रिय, मेरठ-हापुड़ लोकसभा सांसद अरुण गोविल ने एक अनूठा अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस अभियान का नाम 'घर-घर रामायण' रखा गया है। जिसके तहत रामायण की विभिन्न भाषाओं में 11 लाख प्रतियां पूरे देश में वितरित की जाएंगी। वो भी 5 साल में, जिस के लिए सांसद अरुण गोविल ने प्रेसवार्ता कर जानकारी दी।
मीडिया से बात करते हुए अरुण गोविल ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य सामाजिक, पारिवारिक और सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देना है। इस अभियान की शुरुआत 22 जनवरी को किठौर और हापुड़ के ग्रामीण क्षेत्रों से की जाएगी। यह दिन रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर चुना गया है।
आपको बता दे मेरठ में अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि यह अभियान पूरे देश में चलाया जाएगा। उनका मानना है कि रामायण जैसे पवित्र ग्रंथ को घर-घर पहुंचाकर समाज में एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूती मिलेगी।
जहां सांसद अरुण गोविल के इस पहल से लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। उनके इस कदम से रामायण की महत्वता और इसके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास निश्चित रूप से सफल होगा और बताया कि इस पवित्र ग्रंथ को हर धर्म का व्यक्ति ले सकता है जो लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि हमारे लिए रिश्ते खत्म होते चले जा रहे हैं, वह चाहे पारिवारिक रिश्ते हो, चाहे सामाजिक रिश्ते हो, चाहे आसपास के रिश्ते हो। पहले रिश्ते हुआ करते थे कोई व्यक्ति पूछता था कि मुझे यहां जाना है तो वह घर तक छोड़कर आता था और अब जाना इधर होता है तो भेज उधर देता है। सब कुछ धीरे-धीरे पता नहीं क्यों पतन होता जा रहा है। मूल्य का पतन होता जा रहा है, हमारी धरोहर है रामायण उसको हम उपयोग इस काम के लिए करें कि हम परिवार में एक दूसरे को कुछ दे सकें। समाज में एक दूसरे को कुछ दे सके, आज रामायण में कुछ भी आप उठा कर देखें कुछ भी पढ़ लीजिए, उसमें से पिता पुत्र का संबंध पढ़ लीजिए, मां बेटे का संबंध पढ़ लीजिए, पति-पत्नी का संबंध पढ़ लीजिए, मित्रों का संबंध पढ़ लीजिए और तो और जिन से कोई संबंध नहीं था जातियों के संबंध पढ़ लीजिए। यहां तक की दुश्मनों के संबंध भी पढ़ लीजिए। जब राम जी को जरूरत पड़ी थी तो रावण ब्राह्मण बनकर आए थे जब युद्ध चल रहा था। यहां तक की दुश्मनों की भी एक रिश्ता होता है। यह रामायण हमें बताती है। तो मेरा मन नहीं खयाल आया कि क्यों ना घर-घर रामायण हम पहुंचाएं। इस सोच के बाद मेरे मन में एक व्यक्ति आया जो व्यक्ति था हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैंने उन्हें खत लिखा कि मैं घर-घर रामायण अभियान शुरू करना चाहता हूं मुझे आपका एक मैसेज चाहिएl जब खुद का जवाब नहीं आया तो मैं खुद उनसे मिलने गया।
वहीं 15 तारीख को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का एक संदेश हमें मिला पूरे एक पेज का दो लाइन नहीं है। पूरा संदेश है जो रामायण में हमने लगाया है इतना अच्छा संदेश मुझे नहीं याद पड़ता कि मैं कभी पढ़ा हो रामायण की जितनी अच्छी व्याख्या उन्होंने की है अपने आप में अद्भुत है मुझे इतनी खुशी हुई थी उसे वक्त खोल कर पढ़ मेरी पत्नी मेरे साथीमैं जब वह संदेश पढ़ तो मेरे मुंह से निकला यस जिसका मुझे इंतजार था वह हो गया मुझे वह संदेश मिल गया।
मैं ये मानकर नहीं चलता कि मैं कोई कार्य कर रहा हूं बल्कि राम जी ने मेरे मन में डाला है। 11 लाख रामायण हम इस अभियान में लोगों को देंगे वह भी निशुल्क और 5 वर्ष में हम यह पूरा काम करेंगे जिस भी भाषा में हमसे कोई मांगेगा वह हम उसको भेज देंगे। हम अपने जीवन में खुश समस्याएं पैदा करते हैं अपनी नेगेटिविटी से सिर्फ अपने लिए सोच कर हम सिर्फ अपने लिए सोचते हैं एक समय ऐसा आता है पति-पत्नी बहुत नजदीक होते हैं मां बेटे बहुत नजदीक होते हैं पर एक समय ऐसा आता है। लोगों के जीवन में तो वह वहां भी नहीं सोचते सिर्फ अपने लिए सोचते हैं ये घर-घर ramayan.com पर जाकर ले सकते हैं।
जिसके बाद उन्होंने बताया किनयह अभियान एक व्यक्ति का काम नहीं है हमें रामायण वितरित करनी है सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं उसको अपने जीवन में उतरने के लिए। रामायण का 10% भी हम अपने जीवन में उतार लें दो-तीन चीज ही हैं पारिवारिक रिश्ते सामाजिक रिश्ते जिस जाति भेद और जाति के नाम पर जो हम करते हैं जो कर रहे हैं हम सब इंसान हैं अगर सिर्फ इंसानी बनकर रहे तो बहुत अच्छा है। घर में शांति नहीं है तो आप काम नहीं कर पाएंगे कभी नहीं होता घर में लड़कर आए हो तो उसके बाद काम में मन नहीं लग सकता। पारिवारिक रिश्तों में शांति होना जरूरी है। 11 लाख प्रतियां हम बाटेंगे और 5 साल के समय में बाटेंगे उसके लिए सब का सहयोग चाहिए जो तरीका हमने सोचा है जो हम यहीं से इसको शुरू करेंगे सबसे पहले देहात से शुरू करेंगे। रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि पर वहां से शुरू करेंगे पूजा हमने हिंदी तिथि के अनुसार कर ली है पहले हम किठौर और फिर हापुड़ से इसको शुरू करेंगे और वहां पर कोई भी भाषण बाजी नहीं होगी कोई मंच नहीं लगेगा कुछ नहीं होगा। यह व्यक्तिगत रूप से अरुण गोयल की सोच है भाजपा के जो लोग जुड़ना चाहे वह इसमें जोड़ सकते हैं मैं भाजपा का सांसद हूं भाजपा का कार्यकर्ता हूं।