सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में गंगा का पानी, जिसमें महाकुंभ के दौरान हर दिन लाखों लोग स्नान कर रहे हैं। मौजूदा समय में स्नान के लिए खतरनाक है क्योंकि ये पानी की गुणवत्ता की कसौटी के लिए तय जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) की निर्धारित सीमा से अधिक है। बीओडी एक जल निकाय में कार्बनिक पदार्थों को तोड़ने के लिए एरोबिक सूक्ष्मजीवों द्वारा जरूरी ऑक्सीजन की मात्रा को बताता है। उच्च बीओडी स्तर पानी में अधिक कार्बनिक चीजों का संकेत देता है। यदि बीओडी का स्तर तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है तो नदी का पानी नहाने के लिए अच्छा माना जाता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को बताया कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कई जगहों पर मल कोलीफॉर्म स्तरों के मामले में स्नान के लिए पानी गुणवत्ता मानकों के हिसाब से नहीं हैं। हालांकि, इसमें कहा गया है कि नदी के पानी की गुणवत्ता 13 जनवरी के बाद "कई जगहों पर मीठे पानी के मिलने से" बीओडी के मामले में स्नान के मानदंडों को पूरा करती है। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि संगम पर नदी का पानी इस समय बीओडी की सुरक्षित सीमा से भी अधिक है।
16 फरवरी को सुबह पांच बजे संगम पर बीओडी स्तर 5.09 मिलीग्राम प्रति लीटर था। 18 फरवरी को शाम पांच बजे ये 4.6 मिलीग्राम प्रति लीटर और 19 फरवरी यानी बुधवार की सुबह आठ बजे 5.29 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक 13 जनवरी को जब महाकुंभ शुरू हुआ था, तब संगम पर बीओडी का स्तर 3.94 मिलीग्राम प्रति लीटर था।
14 जनवरी यानी मकर संक्रांति को ये सुधरकर 2.28 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया था और 15 जनवरी को घटकर एक मिलीग्राम प्रति लीटर रह गया था। हालांकि 24 जनवरी को ये बढ़कर 4.08 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया था और 29 जनवरी यानी मौनी अमावस्या को 3.26 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के अनुसार स्नान मानकों को पूरा करने के लिए गंगा में 10,000 से 11,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
महाकुंभ के दौरान संगम में गंगा के पानी में उच्च बीओडी स्तर
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