सावन के महीने के पहले सोमवार को देश भर के शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन के महीने में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक श्रद्धालु पूरी आस्था और भक्ति के साथ पूजा-पाठ कर रहे हैं। दोनों ही राज्यों में स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
सावन के पहले सोमवार की शुरुआत वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भव्य मंगला आरती के साथ हुई। भक्तों ने भगवान शिव को जल, दूध, चंदन समेत पवित्र सामग्री अर्पित की। भोले का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर में हजारों श्रद्धालु कतार में खड़े नजर आए।
भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात निगरानी ड्रोन सहित उच्च तकनीक वाले सुरक्षा उपायों के बीच भक्तों का स्वागत पुष्प वर्षा से किया गया। गाजियाबाद के दूधेश्वर नाथ मंदिर से भी कुछ ऐसी ही तस्वीरें आईं। हजारों की संख्या में यहां श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। मान्यता है कि रावण इस मंदिर में प्रार्थना और ध्यान किया करता थे, जहां शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है।
सावन के पहले सोमवार पर बाराबंकी के लोधेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले पूरा प्रांगण 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा और भक्त जलाभिषेक के लिए कतारों में खड़े हो गए। प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर में भी अद्भुत नजारा दिखा। सावन के पहले सोमवार पर मंदिर में पंचामृत अभिषेक किया गया। पवित्र शिवलिंग को शहद, घी, दही, दूध और गन्ने के रस से अभिषेक किया।
लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर में भी सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। यहां दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु मंदिर में प्रशासन की तरफ से किए गए इंतजामों की सराहना कर रहे हैं। पवित्र नगरी अयोध्या के नागेश्वर नाथ मंदिर में भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान राम के पुत्र कुश ने की थी।
गोरखपुर के शिव मंदिरों में भी भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। काफी संख्या में यहां श्रद्धालु जल चढ़ाने पहुंचे। सावन के पहले सोमवार पर पवित्र नगरी हरिद्वार भी 'हर हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठी। शहर के प्रसिद्ध दक्ष मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को जल चढ़ाया।
हरिद्वार के दक्ष मंदिर की भगवान शिव के भक्तों और कांवड़ियों के बीच काफी मान्यता है। ये मंदिर भगवान शिव और देवी सती को समर्पित है।सावन के महीने में कांवड़िए शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए गंगा नदी से पवित्र जल लेकर आते हैं। देहरादून के टपकेश्वर महादेव मंदिर में काफी भीड़ लगी हुई है। सैकड़ों श्रद्धालु यहां धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना करने पहुंच रहे हैं।
कहा जाता है कि सावन के पहले सोमवार पर अगर श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजन किया जाए, तो भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना पूरी करते हैं। मान्यता है कि देवताओं और असुरों के बीच जो समुद्र मंथन हुआ था, वो सावन के महीने में ही किया गया था। समुद्र मंथन देवताओं और असुरों के बीच हुआ एक ऐसा मंथन है, जिसमें 14 रत्न निकले थे। भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को पिया था।
ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक, सावन जुलाई और अगस्त के बीच पड़ता है, जब भारत में मानसून का मौसम चल रहा होता है।