सनातन धर्म, जिसे आज समस्त विश्व हिंदू धर्म के रूप में जानता है, विश्व का सबसे प्राचीन धर्म माना जाता है। 'सनातन' का अर्थ है शाश्वत या अनंत जिसका न आदि है, न अंत। 'धर्म' का अर्थ होता है कर्तव्य और सत्य। इस प्रकार 'सनातन धर्म' का अर्थ है शाश्वत धर्म या शाश्वत नियमों का पालन। यह केवल एक धर्म नहीं है, बल्कि जीवन की एक ऐसी विधि है जो मानव को ईश्वर के समीप ले जाती है। यह धर्म मानवता को सत्य, कर्तव्य और मोक्ष के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
सनातन धर्म का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसे लगभग 12,000 वर्ष पुराना माना जाता है, जबकि अन्य पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह धर्म लगभग 90,000 वर्ष पुराना भी माना गया है। सनातन धर्म की कोई स्थापना तिथि नहीं है, क्योंकि यह किसी एक व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया, बल्कि यह धरती पर मानव के साथ विकसित हुआ है। ऐसा भी माना जाता है कि सनातन धर्म के वेद—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं, जो लगभग 7,500 वर्ष पुराने माने जाते हैं। इन वेदों में मंत्र, यज्ञ, दर्शन और जीवन के गूढ़ तत्वों का वर्णन है। उपनिषदों में आत्मा और ब्रह्मा के संबंध की भी विस्तार से चर्चा की गई है।
सनातन धर्म के मूल सिद्धांत यह बताते हैं कि जैसा कर्म करोगे, वैसा ही फल मिलेगा। यह धर्म आत्मा के पुनर्जन्म और मोक्ष के सिद्धांत पर आधारित है। संतुलित जीवन प्राप्त करने के लिए सनातन धर्म ने चार पुरुषार्थों—धर्म (कर्तव्य), अर्थ (संपत्ति), काम (इच्छा) और मोक्ष (मुक्ति)—की स्थापना की है। सनातन धर्म हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन में सत्य, अहिंसा और नैतिकता का पालन करना चाहिए। यह धर्म हमें हमारे कर्मों को समझने और अच्छे कार्य करने की प्रेरणा देता है। सनातन धर्म न केवल धार्मिक आस्थाओं का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन जीने की एक संपूर्ण विधि है, जो नैतिकता की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।