भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्राणप्रिया राधा रानी के जन्म का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन राधा रानी की पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण भी खुश होते हैं और भक्तों को उनकी विशेष कृपा मिलती है। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद आता है। इस साल यह पर्व आज यानी 31 अगस्त को पड़ रहा है।
पंचामृत का सामान - लाल रंग की चुनरी, सिंदूर, रोली, कुमकुम, अक्षत, धूप-दीप, चंदन, फूल, माला, गंगाजल, लाल या गुलाबी वस्त्र, आभूषण, इत्र, मोर पंख, बांसुरी, शृंगार का सामान, घी, दीपक, राधा अष्टमी कथा पुस्तक आदि।
भोग सामग्री - भोग में माखन-मिश्री, खीर, फल और मिठाई आदि शामिल करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन राधा रानी को अरबी का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। वहीं, अमृत काल रात 11:37 बजे से अगले दिन दोपहर 01:23 बजे तक रहेगा। इस दौरान पूजा-पाठ से लेकर आप कोई भी शुभ काम कर सकते हैं।
राधा अष्टमी पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें।
- व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें।
- राधा रानी की मूर्ति स्थापित करें।
- सबसे पहले राधा रानी और भगवान कृष्ण की प्रतिमा को पंचामृत से अभिषेक कराएं।
- इसके बाद उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाकर सोलह शृंगार करें।
- भोग में उन्हें पीली मिठाई, पंचामृत, फल और पंजीरी अर्पित करें।
- पूजा के दौरान राधा रानी के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।
- अगले दिन व्रत का पारण करें।
राधा रानी पूजन मंत्र
- ॐ वृषभानुज्यै विधमहे, कृष्णप्रियायै धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात।
- ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे गान्धर्विकायै विधीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्।।