दक्षिण कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 7,500 से ज्यादा तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था सोमवार देर रात को जम्मू से रवाना हुआ। घाटी के दो मार्गों से तीन जुलाई को 38 दिनों की तीर्थयात्रा शुरू हुई थी। पहला मार्ग अनंतनाग जिले में 48 किलोमीटर लंबा पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग है और दूसरा मार्ग गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर का छोटा, लेकिन ज्यादा खड़ी चढ़ाई वाला बालटाल मार्ग है। यात्रा नौ अगस्त को खत्म होगी।
यात्रा शुरू होने के बाद से 94,000 से ज्यादा तीर्थयात्री अमरनाथ गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। 5,516 पुरुषों और 1,765 महिलाओं समेत 7,541 तीर्थयात्रियों का सातवां जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सोमवार देर रात दो बजकर 55 मिनट से सुबह चार बजकर पांच मिनट के बीच भगवती नगर आधार शिविर से 309 वाहनों में कश्मीर के दो आधार शिविरों के लिए रवाना हुआ।
3,321 तीर्थयात्रियों को लेकर पहला काफिला 148 गाड़ियों में गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे छोटे लेकिन ज्यादा खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग के लिए रवाना हुआ, जिसके बाद 161 गाड़ियों में 4,220 तीर्थयात्रियों का दूसरा काफिला अनंतनाग जिले में 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम मार्ग से यात्रा पर निकला।
मौके पर ही पंजीकरण को लेकर काउंटर पर भारी भीड़ है, जबकि अधिकारियों ने काउंटर की संख्या 12 से बढ़ाकर 15 कर दी है। साथ ही भीड़ को कम करने के लिए दैनिक कोटा 4,100 कर दिया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से 4,000 से ज्यादा श्रद्धालु अपना पंजीकरण कराने के लिए जम्मू पहुंचे। अब तक 3.5 लाख से ज्यादा लोगों ने तीर्थयात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया है।
जम्मू भर में 34 आवास केंद्र स्थापित किए गए हैं और तीर्थयात्रियों को ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (आरएफआईडी) टैग जारी किए जा रहे हैं।
तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की कुल 180 कंपनियां तैनात की गई हैं, जो पिछले सालों की तुलना में 30 ज्यादा हैं।