नई दिल्ली: भारत को अपनी बढ़ती बिजली मांग और ऊर्जा परिवर्तन (एनर्जी ट्रांजिशन) को पूरा करने के लिए अगले दो दशकों में पावर सेक्टर में लगभग 2.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। यह बात पावर सेक्रेटरी पंकज अग्रवाल ने गुरुवार को भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में कही।
उन्होंने कहा कि इस बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए पावर सेक्टर का वित्तीय रूप से मजबूत और व्यवहार्य होना बेहद जरूरी है। अग्रवाल ने बताया कि आज बिजली सिर्फ एक बुनियादी सेवा नहीं रह गई है, बल्कि यह आर्थिक विकास, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक समावेशन की रीढ़ बन चुकी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बिजली क्षेत्र में बड़ा बदलाव हो रहा है, जहां देश ऊर्जा सुरक्षा, किफायत और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत भी इसी दिशा में काम कर रहा है और सभी को सस्ती, भरोसेमंद और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है।
अग्रवाल ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के पावर सेक्टर में काफी विस्तार हुआ है और देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 500 गीगावॉट से अधिक हो गई है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा का बड़ा योगदान है। खासतौर पर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ा है और दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब नवीकरणीय ऊर्जा निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के क्षेत्र में भी उभर रहा है, जिसमें सरकार की नीतियों और निजी क्षेत्र की भागीदारी का बड़ा योगदान है।
ग्रिड सिस्टम को लेकर उन्होंने बताया कि भारत दुनिया के सबसे बड़े एकीकृत बिजली नेटवर्क में से एक संचालित करता है और इसकी मजबूती व विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। साथ ही, स्मार्ट मीटर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे बिजली वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और डेटा आधारित बनेगी। अग्रवाल ने जोर देते हुए कहा कि अब अगला चरण केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण का नहीं, बल्कि सिस्टम में सुधार का होगा। इसमें बाजार ढांचा, मूल्य निर्धारण और संस्थागत नवाचार पर ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी, वैसे-वैसे ऊर्जा भंडारण (स्टोरेज), डिमांड रिस्पॉन्स और लचीले उत्पादन जैसे नए समाधान जरूरी होंगे। इससे नए बिजनेस मॉडल और उपभोक्ता सहभागिता के अवसर भी बढ़ेंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर चार्जिंग पैटर्न को नवीकरणीय ऊर्जा के अनुसार ढाला जाए, तो यह पूरे सिस्टम की दक्षता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
वही, अंत में उन्होंने कहा कि इस बड़े बदलाव के लिए वैश्विक साझेदारी और निरंतर निवेश जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस समिट की सफलता उसके आकार से नहीं, बल्कि उसके ठोस परिणामों से तय होगी।